
IRFC Share Analysis
इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRFC) भारत सरकार के रेल मंत्रालय के तहत एक पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज है। इसे 12 दिसंबर 1986 को इंडियन रेलवे की खास फाइनेंसिंग शाखा के तौर पर बनाया गया था, जो रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और संचालन को सपोर्ट करने के लिए घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पूंजी बाजारों से फंड जुटाती है। अगर आप IRFC शेयर में इन्वेस्ट करना चाहते हैं तो आपको यहां पर IRFC Share Analysis के बारे में बहुत कुछ मिलेगा।
प्रकार: नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र का उद्यम
मुख्यालय: नई दिल्ली, भारत
मालिक: भारत सरकार के पास लगभग 86% शेयर हैं, बाकी शेयर सार्वजनिक रूप से ट्रेड होते हैं।
IRFC एक नवरत्न PSU बन गया है, जिससे इसे ज़्यादा परिचालन और वित्तीय स्वायत्तता मिलती है।
मुख्य बिज़नेस एक्टिविटीज़: बॉन्ड, लोन और कैपिटल मार्केट के ज़रिए फंड जुटाना।
इंडियन रेलवे के लिए लोकोमोटिव, पैसेंजर कोच, वैगन और दूसरे रोलिंग स्टॉक की फाइनेंसिंग
रेलवे से जुड़ी एंटिटीज़ और सब्सिडियरी कंपनियों को लीज़ पर देना और उधार देना।
इंडिया के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर की ग्रोथ और मॉडर्नाइज़ेशन में मदद करना ।
हालिया प्रदर्शन और मार्केट सेंटिमेंट
स्टॉक मूवमेंट हाइलाइट्स (दिसंबर 2025)
IRFC के शेयरों में कुछ ट्रेडिंग दिनों में बढ़त देखी गई, तब भी जब बड़े मार्केट सपाट या नीचे थे – जो कुछ पॉजिटिव इन्वेस्टर इंटरेस्ट का संकेत देता है।
हालांकि, 2025 की शुरुआत में स्टॉक में कमजोरी भी देखी गई, जिसमें अपने हाई लेवल से काफी गिरावट आई (~पिछले साल में 24-28% का नुकसान)।
सेक्टर ट्रेंड का असर:
पूरे रेलवे सेक्टर ने 2025 में अस्थिर प्रदर्शन देखा, जिसमें इन्वेस्टर की संपत्ति में कमी और कमजोर स्टॉक रिटर्न ने IRFC सहित रेलवे से जुड़े PSU स्टॉक्स को प्रभावित किया।

वित्तीय परिणाम और कंपनी की सेहत
IRFC की तिमाही कमाई लगातार मुनाफ़ा दिखाती है:
Q1 FY26: नेट प्रॉफ़िट सालाना आधार पर ~11% बढ़कर रिकॉर्ड ₹1,746 करोड़ हो गया।
Q2 FY26: नेट प्रॉफ़िट सालाना आधार पर ~10% बढ़कर ₹1,777 करोड़ हो गया; प्रति शेयर ₹1.05 का डिविडेंड घोषित किया गया।
ये नतीजे रेवेन्यू में उतार-चढ़ाव के बावजूद स्थिर कमाई में बढ़ोतरी को दिखाते हैं।
निवेश पर विचार
फायदे:
निवेश के फायदे 💹
🚆 मज़बूत सरकारी सपोर्ट
💰 स्थिर कमाई + डिविडेंड
🏗️ देश के इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़
नुकसान/जोखिम:
ब्याज दरों और डेट मार्केट पर बहुत ज़्यादा निर्भर ।
पूरे सेक्टर में उतार-चढ़ाव के साथ स्टॉक का प्रदर्शन अस्थिर हो सकता है ।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा कीमतों पर स्टॉक अपनी असल कीमत के मुकाबले ज़्यादा महंगा हो सकता है।

